आसमान नीला दिखाई देने का कारण एक प्रक्रिया है जिसे रैले स्कैटरिंग (Rayleigh scattering) कहा जाता है। जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो यह गैस के अणुओं, जैसे नाइट्रोजन और ऑक्सीजन, से टकराता है। ये अणु सूर्य के प्रकाश को सभी दिशाओं में बिखेरते हैं।
सूर्य के प्रकाश में विभिन्न रंग होते हैं, और हर रंग की तरंग दैर्ध्य (wavelength) अलग-अलग होती है। नीली रोशनी की तरंग दैर्ध्य छोटी होती है और इसकी ऊर्जा अधिक होती है, जबकि लाल या पीले जैसे रंगों की तरंग दैर्ध्य लंबी होती है। छोटी तरंग दैर्ध्य होने के कारण नीली रोशनी वायुमंडल के छोटे अणुओं द्वारा अधिक प्रभावी ढंग से बिखरती है।
इसलिए जब आप आसमान की ओर देखते हैं, तो आपको अन्य रंगों की अपेक्षा अधिक बिखरी हुई नीली रोशनी दिखाई देती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय, सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से अधिक दूरी तय करता है, जिससे नीली रोशनी बिखर जाती है और लाल तथा नारंगी रंग प्रमुख हो जाते हैं, जिससे आकाश का रंग लालिमायुक्त दिखाई देता है।
